Saturday, January 8, 2011

उन लम्हों को गुस्ताख ना कहो

उसकी यादे समाइ हुई है उसमे

साहील न मेरा बन सका तो क्या

किसी और कश्ती लगा देगा किनारे



दिये खार फिर भी मलाल नही

प्यार का जुनू जो है सवार

मेरे अहसास मे उसके लिये

रहेंगे सदा गुलाब खिलकर



तनहा सही हम महफिल मे चलो

यादों कि रोशनी तो मन मे होगी

उठेगी बात जब मेरे आसुओं की

उसके तज्कीरे के सिवा खत्म ना होगी



स्नेहा (देवराई )

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