उन लम्हों को गुस्ताख ना कहो
उसकी यादे समाइ हुई है उसमे
साहील न मेरा बन सका तो क्या
किसी और कश्ती लगा देगा किनारे
दिये खार फिर भी मलाल नही
प्यार का जुनू जो है सवार
मेरे अहसास मे उसके लिये
रहेंगे सदा गुलाब खिलकर
तनहा सही हम महफिल मे चलो
यादों कि रोशनी तो मन मे होगी
उठेगी बात जब मेरे आसुओं की
उसके तज्कीरे के सिवा खत्म ना होगी
स्नेहा (देवराई )
Saturday, January 8, 2011
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