ऐसे फिसले के कोई दवा काम ना आई
बुनियाद ही झुठी थी सपनों के महल की
जर्र सा झोका आया और नीव हिला दी
फिर भी खडे है जुनु मे तुम्हारे
प्यार नही पर तगाफुल ही सही
नही होगी शायद अहलीयत हमारी
के जगह दो तुम हमे काइनात मे तुम्हारी
मलाल नही है किसी के जफा का
इस शबे- गम का कोई सहर नही
उठने से पहले जनाजा, इक इल्तजा सुन लो हमारी
कफन को जेब सिला दो , रखो तसवीर उसमे तुम्हारी
स्नेहा {देवराई }
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